खनिजों के विभिन्न प्रका

खनिजों के विभिन्न प्रकार (Different. types of Minerals)

Geography

खनिज संसाधनों का वितरण वनस्पति एवं पशुओं से भिन्न हैं क्योंकि इस पर जलवायु के साथ-साथ पृथ्वीं के आंतरिक संरचना का भी नियंत्रण होता है। खनिजों का वितरण कमोबेश सम्पूर्ण विश्व में पाया जाता है चाहे क्यों न भिन्न-भिन्न जलवायु हो । धात्विक खनिजें यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा निर्मित होती है तथा उबड़-खाबड़ धरातलों पर पायी जाती है । जबकि अधात्विक खनिजों (कोयला, पेट्रोलियम) का निर्माण रसायनिक विच्छेदन की प्रक्रिया द्वारा अत्यंत निम्नवर्ती धरातलों में होती है ।

खनिजों के विभिन्न प्रकार (Different. types of Minerals)

खनिजों की प्राकृतिक संरचना, उपलब्धता, प्रयोग (महत्व) तथा निर्माण प्रक्रिया में पर्याप्त भिन्नता पायी जाती है । उपरोक्त दृष्टिकोण से खनिजों के वर्गीकरण के कई आधार हो सकते हैं जो अग्रांकित हैं :

A. रासायनिक संयोजन के आधार पर

  • (i) प्राकृतिक तत्त्व
  • (ii) ऑक्साइड खनिज
  • (iii) सल्फाइड खनिज
  • (iv) कार्बोनेट खनिज
  • (v) सल्फेट खनिज
  • (vi) सिलिकेट खनिज

B. उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर

  • (i) प्राथमिक
  • (ii) गौण खनिज

C. शैल महत्त्व के आधार पर

  • (i) अनिवार्य खनिज
  • (ii) सहायक खनिज

D. आर्थिक उपयोग की दृष्टि से खनिज के तीन प्रकार है

  • i) उर्जा खनिज
  • (ii) धात्विक खनिज
  • (iii) अधात्विक खनिज

यहाँ आर्थिक उपयोग की दृष्टि से वर्गीकृत खनिज का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जा रहा है – 

(i) ऊर्जा खनिज : ऊर्जा खनिज को इसकी गुणवता के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जा सकता है

  • (a) जीवाश्म ऊर्जा खनिज
  • (b) गैर जीवाश्म ऊर्जा खनिज

जीवाश्म ऊर्जा खनिज से आधुनिक औद्योगिक संस्कृति का आधार स्तंभ है । इसके अंतर्गत कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को रखा जाता है।

गैर जीवाश्म ऊर्जा खनिज के अंतर्गत मूलतः आण्विक खनिजों को रखा जाता है । यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम जैसे आण्विक खनिज नाभिकीय विखंडन या संलयन द्वारा अपार ऊर्जा मुक्त करते हैं । किन्तु इनका संचित भण्डार अत्यल्प है ।

(ii) धात्विक खनिज : ऐसे खनिज जिससे धातु की प्राप्ति होती है धात्विक खनिज कहलाते हैं। लौह की मात्रा को ध्यान में रखकर खनिज को दो भागों में बाँटा जा सकता है :

  • (a) लौह धात्विक खनिज : इन खनिजों में लौहांश पाया जाता है । जैसे-लोहा, मैग्नीज, क्रोमियम, निकेल, टंग्सटन, कोबाल्ट, मॉलिब्डेनम, वेनेडियम आदि ।
  • (b) अलौह धात्विक खनिज : ऐसे खनिज लौहांश रहित होते हैं । जैसे- ताँबा, एल्युमीनियम, टिन, जस्ता, सीसा, सोना, चाँदी, प्लेटिनम, अभ्रक आदि खनिज ।

(iii) अधात्विक खनिज : इस प्रकार के खनिजों में धातु की मात्रा का लोप होता है । जिप्सम, एस्बेस्टस, नमक, नाइट्रेट, गंधक, संगमरमर, हीरा, ग्रेनाइट जैसे खनिज अधात्विक खनिज हैं ।

खनिजों का महत्त्व (Importance of Minerals)

मानव अपनी इच्छानुसार प्राकृतिक संसाधन का उपभोग कर अपने आपको वातावरण के अनुसार अनुकूलित कर लिया है । यही वजह है कि संसार के सभी क्षेत्र के मानवीय जीवन पर पर्यावरण का प्रत्यक्ष प्रभाव लक्षित होता है । मानव के सभ्यता एवं संस्कृति के सुदृढ़ीकरण में खनिज का बहुत बड़ा योगदान है ।

खनिज की इसी उपयोगिता ने विश्वस्तर पर खनिज सम्पन्न देशों को विश्व का अखाड़ा बना दिया है । आज सम्पूर्ण देश खनिज लोलुपता का शिकार है । खनिजों महत्त्व को अद्योलिखित शीर्षकों से समझा जा सकता है :

(i) औद्योगिक महत्त्व : खनिज औद्योगिक जगत् की नींव होती है । उद्योगों की स्थापना खनिजों की उपलब्ध ता द्वारा निर्धारित होती हैं। कोयला, लोहा, जैसे खनिज उद्योग के नियंत्रक तत्त्वों में से एक हैं। खनिजों की विविधता द्वारा उद्योगों का विशिष्टीकरण (Specialization) निर्भर है । उद्योग का स्तर किसी भी देश के विकास का मापक होता है ।

(ii) सामाजिक एवं राजनैतिक महत्त्व : खनिज की उपलब्धता बहुत हद तक सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करते है । खनिज के खनन से लेकर उसके परिष्करण एवं उससे विभिन्न वस्तुओं के निर्माण करने तक इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलते है। खनिज से प्राप्त अक्सर आय के साधन प्रदान करते हैं जिससे समाज के स्तर प्रभावित होते हैं ।

राजनैतिक दृष्टि से अगर खनिज का मूल्यांकन किया जाय तो पता चलता है कि जिस देश के पास जितना खनिज संसाधन है वह उतना ही धनी है । खाड़ी के देश पेट्रोलियम की बहुलता के कारण सामरिक रुप से सशक्त देशों यथा अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देशों के लिए वैश्विक अखाड़ा बना हुआ है । उद्देश्य केवल और केवल यह है कि अपने देश को खनिज संसाधन सम्पन्न बनाना है ।

(iii) सांस्कृतिक महत्त्व : खनिज का प्रभाव न केवल आधुनिक सभ्यता एवं संस्कृति पर है वरन् इसका प्राचीन प्रभाव प्राचीन सभ्यता संस्कृति पर भी है रहा है । खनिज के अन्वेषण उत्खनन एवं प्रयोग ने मानव के जीवन पद्धति को व्यवस्थित किया है । इतिहास में भी खनिजों के नाम पर ताम्र युग, कांस्य युग, लौह युग का चलन था । खनिजों के नाम पर सिंधु घाटी सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता कहा गया । खनिज आर्थिक दृष्टि से ही महत्त्व नहीं धारण करता है वरन् इसने संस्कृति को भी प्रभावित किया है ।

(iv) औषधीय महत्त्व : लौह भस्म, स्वर्ण भस्म, लवण एवं शिलाजीत जैसे औषधीय खनिज चिकित्सीय उपयोग की सामग्री हैं । ये खनिज मानव जगत के लिए व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं ।

(v) सामारिक महत्त्व : खनिज सामरिक दृष्टि से आज महत्त्वपूर्ण हो गये हैं । वर्त्तमान परिवेश में आण्विक हथियारों का होड़ लगा हुआ है । जो देश आण्विक अस्त्रों-शस्त्रों से लैस है उसकी पहचान सशक्त राष्ट्रो में की जाती है । इसलिए खनिजों का सामरिक महत्त्व बढ़ गया है ।

(vi) घरेलू महत्त्व : बड़े-बड़े विनिर्माण उद्योगों के कल-पुर्जी से लेकर काँटी, चाकू जैसे उपयोगी उपकरण, रंग-रोगण, यातायात के साधन के निर्माण, फर्नीचर, भवन निर्माण इत्यादि में भी खनिज का महत्त्व अविस्मरणीय है । यूँ कहे कि खनिज के बगैर मानव समाज के उत्थान की बात अतिश्योक्ति ही होगी ।

Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *